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Sunday, June 23, 2024

कोफ़्ता शब्द कहाँ से आया ?

लेखक – राजेन्द्र गुप्ता

अनेक बच्चों, और बड़ों को भी, सब्जियाँ खाना पसंद नहीं है। लौकीकद्दूबैंगनपालक आदि के नाम पर तो अनेक बच्चे नाक सुकेड़ते हैं और बड़े भौं सुकेड़ते हैं। जब पूरी कोशिशों के बाद भी कोई माँ  बच्चों को सब्जियाँ नहीं खिला पाती तब उस समय के लिए उस माँ के पास कुछ गोपनीय पाक-विधि या सीक्रेट रेसिपीज होती हैं। उसे पता है कि बच्चों को गुप्त रूप से लौकीकद्दूबैंगन कैसे खिलाना है। वह सब्जियों को बारीक काट कर या कद्दू-कस करके बेसन के गाढ़े घोल में मिलाती है और फिर उसके पकोड़े बना कर उसकी  सब्जी या सालन बनाती है। इस तरह नापसंद लौकी और कद्दू की सब्जी भी गुप्त रूप से बच्चों को खिला दी जाती है। बच्चे स्वाद से खाते है और दोबारा मांगते हैं। 

कोफ़्ता (फोटो विकिपीडिया से साभार)

बच्चों को लौकी, कद्दू, बैंगन, पालक आदि की सब्जी को गुप्त रूप से खिलाने को ही कोफ्ता खिलाना कहते हैं। क्या आपके दिमाग की बत्ती जलीआपने ठीक जाना। कोफ़्ता का नामकरण कुछ ऐसे हुआ --  

गुप्त सब्जी > गुप्ता सब्जी > गोप्ता सब्जी > कोफ़्ता सब्जी > कोफ़्ता !

मेरे एक कश्मीरी मित्र मेरे नाम को गुप्ता नहीं गुफ़्ता बोलते हैं। मैं उनका धन्यवाद करता हूँ कि वह मुझे गुफ़्ता ही बोलते हैं, कोफ़्ता नहीं !!     

अब एक और रोचक बात। अगर हम टी.वी. पर रसोई कार्यक्रम वाले प्रसिद्ध भोजन ब्लॉगर और भोजन के बड़े इतिहासकार दाढ़ी वाले प्रोफेसर साहब की माने तो प्रत्येक स्वादिष्ट व्यंजन की तरह कोफ्ते का आविष्कार भी मुग़ल बादशाह अकबर ने किया था। फारसी में कोफ़्त का अर्थ है पीटना। अतः माँस को कोफ़्त कर अथवा पीट कर बनाया गया व्यंजन कोफ़्ता कहलाया। अरे सर! माना कि आपके अकबर बादशाह कोफ्ता खाते थे; किन्तु यह आवश्यक तो नहीं कि कोफ्ते का आविष्कार भी उनके बावर्चीखाने में ही हुआ था। एक मांसाहारी मुग़ल बादशाह को गुप्त रूप से मीट खिलाने की क्या आवश्यकता थी? यह भी तो हो सकता है कि अकबर के हरम में उसकी अनेक हिन्दू शाकाहारी पत्नियों में से कोई उसके लिए गुप्त रूप से सब्जियाँ खिलाने के चक्कर में गुप्ता / गोप्ता / कोफ़्ता बनाती रही हो!

आपको कोफ़्ता की यह व्युत्पत्ति कैसी लगी? मुझे बताइए।

Saturday, June 22, 2024

कुल्फी शब्द कहाँ से आया ?

लेखक -- राजेन्द्र गुप्ता

कुल्फी रबड़ी जैसे गाढ़े दूध को जमा कर बनायी गयी एक बर्फीली मिठाई है।
इसे पारम्परिक भारतीय आइस-क्रीम भी कहा जाता है; किन्तु आईस-क्रीम की तुलना में कुल्फी अधिक गाढ़ी और मलाईदार होती है। भरी गरमी की दोपहर में ठंडी 
कुल्फी मिल जाए तो और क्या चाहिए। आज देखते हैं कि यह कुल्फी शब्द कहाँ से आया।

संस्कृत शब्दकोशों में कुल्फी के लिए कोई शब्द नहीं है। किन्तु ध्यान रहे कि अनेक शब्द जनता में बोलचाल में प्रचलित होते हैं किन्तु शब्दकोश में नहीं होते।

एक संस्कृत कोश में आइस क्रीम के लिए एक शब्द है -- ‘पयोहिम’। यह पय और हिम शब्दों के मेल से बना है। पय अर्थात दूध और हिम अर्थात बर्फ (स्नो snow। आइस ice)।    

 

संस्कृत में दूध से बनी मीठी चीज जैसे रबड़ी या खीर को पायस कहते हैं। संस्कृत में ठंड को शीत कहते हैं। ठंड से जमी वस्तु को शीताकुल कहते हैं। अतः ठंड से जमा हुआ दूध कहलायेगा शीताकुलपय; और ठंड से जमी हुई रबड़ी कहलायेगी शीताकुलपायस।

 

ऐसा लगता है कि संस्कृत में कुल्फी के लिए यही शीताकुलपय और शीताकुलपायस शब्द प्रचलित रहे होंगे जो बिगड़ कर कुल्फी में बदल गए होंगे।  

शीताकुलपय [संस्कृत का लुप्त शब्द] = ठंड से जमा हुआ दूध

> शीता कुलपय 

> शीता कुलफय

> शीता कुलफी 

> कुलफी / कुल्फी [हिन्दी]  

क़ुल्फ़ी [फ़ारसी]

> क़ुल्फ़ी [उर्दू]  

या फिर   

शीताकुलपायस [संस्कृत का लुप्त शब्द] = रबड़ी से बनी बर्फीली मिठाई 

> शीता कुलफायस 

> शीता कुलफायह 

> शीता कुलफीह 

> शीता कुल्फी 

कुलफी / कुल्फी [हिन्दी]  

> क़ुल्फ़ी [फ़ारसी]

> क़ुल्फ़ी [उर्दू]  

 

अब एक रोचक बात

भोजन के इतिहास के एक जाने माने विद्वान हैं। वह फूड ब्लॉग लिखते हैं और टीवी पर रसोई के एक चर्चित कार्यक्रम में जाने माने विशेषज्ञ हैं। उनकी मानें तो उत्तर भारत का प्रत्येक स्वादिष्ट खाना और मिठाई मुग़लों की देन है। वह कहते हैं कि कुल्फ़ी का आविष्कार भी भारत में 16 वीं सदी में मुग़ल बादशाह अकबर की रसोई में हुआ था ! उस समय कुल्फ़ी जमाने के लिए सैकड़ों मील दूर हिमाचल प्रदेश के चूड-चाँदनी-धार पर्वत से बर्फ को आगरा लाया जाता था।  दूध से कुल्फ़ी बना कर उसे धातु के बर्तनों में ताले में बंद कर दिया जाता था! क्योंकि इस्लाम के मूल स्थान अरब देश की अरबी भाषा में धातु से बने ताले को  क़ुफ़्ल (अथवा क़ुफ़ुल, क़फ़्ल, क़ुफ़ल) कहते हैं, अतः ताले में बंद इस बर्फीली मिठाई विशेष को  क़ुफ़्ली (quflii•قُفْلی) कहा गया। यह क़ुफ़्ली शब्द बिगड़ कर क़ुल्फ़ी हो गया! इस तर्क दूर की कौड़ी भी नहीं कह सकते। विद्वान प्रोफेसर साहब क्षमा करें क़ुफ़्ली (ताला-बंद) से कुल्फ़ी की व्युत्पत्ति निकालने को कहना होगा ‘अक्ल पर ताला पड़ना’, क्योंकि इस कुतर्क के आधार पर किसी अन्य  कोई मूल्यवान ताला-बंद वस्तु जैसे सोना, चांदी, हीरा आदि का नाम भी क़ुफ़्ल यानी ताला पर आधारित होना चाहिए। भाषा विज्ञान में इस तरह तुक्के लगाने के हजारों अन्य उदाहरण हैं। माना कि अकबर की रसोई में कुल्फ़ी अवश्य बनती होगी किन्तु इसका अर्थ यह नहीं कि कुल्फ़ी का आविष्कार भी मुग़लों ने किया और नामकरण भी।

आपको ठंडी कुल्फ़ी का संस्कृत नामकरण कैसा लगा? मुझे बताइए। 

Sunday, June 16, 2024

‘बैगन का भड़ता’ में भड़ता शब्द कहाँ से आया ?

भड़ता / भुड़ता/ भुर्ता / भरता एक स्वादिष्ट भाजी / सालन / चोखा है जो बैंगन को भूनकर तथा मसलकर बनाई जाती है या बनाया जाता है। कुछ लोग आलू का भड़ता भी बनाते हैं । देखते है कि यह भड़ता / भुड़ता/ भुर्ता / भरता / शब्द कहाँ से आया ?

भड़ता शब्द का रहस्य भड़ता बनाने की क्रिया में बैंगन का आग में भूने जाने में छिपा है।

संस्कृत में आग के अनेक पर्यायवाची शब्द हैं, जैसे अग्नि, पेरु, पारू, यज्ञ, ज्वाल, दहयु आदि।

पारु शब्द को लेते हैं। पारु में उच्चारण की गलती से ही अँग्रेज़ी का फायर fire शब्द बना (पारु > फारु > फ़ाउर > फ़ाय्र fire)। इसी तरह पारु में उच्चारण की गलती से ही पारु बदल कर भाड़ बन गया –

पारु > पाड़ु > भाड़ु > भाड़

हिन्दी में भाड़ उस भट्टी को कहते हैं जिसमें बालू को आग पर गरम किया जाता है और उसमें अन्न अथवा अन्य खाद्य सामग्री को भूना जाता है। अतः जो वस्तु भाड़ में भूनी गई उसे भाड़ित कहा जा सकता है वैसे ही जैसे अँग्रेज़ी में फायर यानी आग में भूनी गई वस्तु फायर्ड fired कहलाती है। किन्तु यह प्रयोग हिन्दी में नहीं मिलता।

इस तरह यह स्पष्ट है कि भाड़ में भुनी वस्तु ही भड़ता कहलाई।

भाड़ > भाड़ित >  भड़ता > भुड़ता > भुर्ता > भरता

बैगन का भड़ता मेरा प्रिय व्यंजन है। आशा है की आपको भी भड़ता पसंद है और भड़ता की यह व्युत्पत्ति भी ।

अगर आजकल आप दिल्ली में है और तपती दोपहर में घर से बाहर निकलना पड़ रहा है तो आपको यह कार्टून भी पसंद आयेगा।



-- राजेन्द्र गुप्ता