Tuesday, May 13, 2014

यह मोदी शब्द कहाँ से आया? Etymology of Modi

मोदी का मतलब हैं मोठ दाल वाला 
Modi simply means seller of moth beans 



काशी वाले कबीर जी कह गए थे, “जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान; मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान।” लोकसभा चुनाव में यह दोहा क्यों याद आ गया! शिव शिव! यह नहीं होना चाहिए था। हम भारतीय हैं। हम संत की जात भी पूछते हैं, और पंत की भी। हमारे देश में केवल भारतीय होना काफी नहीं है। लोकसभा चुनाव में श्री नरेंद्र मोदी की जाति का मुद्दा खूब उछला है। इसीलिए, आज मोदी शब्द का डी.एन.ए. टैस्ट प्रस्तुत है। मोदी का सामान्य अर्थ है, दाल, चावल आदि बेचने वाला, पंसारी, परचूनिया, ग्रॉसर (grocer)। भंडारी या स्टोर-कीपर (storekeeper) को भी मोदी कह सकते हैं। और मोदीख़ाना का अर्थ है मोदी की दुकान या भंडार, पंसारी की दुकान, जनरल स्टोर, राशन की दुकान, किराना स्टोर, रसद भंडार, आपूर्ति भंडार। नरेंद्र मोदी गुजरात के मोढ-घाञ्ची समाज से हैं जो परंपरागत रूप से वनस्पति तेल निकालने और बेचने का काम करते रहा है। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि भारत में पीढ़ी-दर-पीढ़ी एक ही व्यवसाय में लगे रहने के कारण पारिवारिक व्यवसाय ही जातियों में बदल गए थे। मेरा विचार है कि मोदी जाति का नामकरण प्राचीन काल में मोठ बेचने के व्यवसाय से शुरू हुआ होगा (मोठ > मोठी > मोढी > मोदी)। इसे समझने के लिए आइये चलें लगभग 10,000 वर्ष पहले कि दुनिया में, जब हमारे भील-शिकारी-घुमंतू पुरखे वनों को छोड़ कर मानव सभ्यता के पहले गाँव बसाना चाह रहे थे। कंद-मूल–फल का संग्रह और शिकार छोड़ कर हमारे पुरखे कृषि करना चाह रहे थे, किन्तु उन्हें अब भी वन में उपजी वस्तुएँ ही खाने के लिए पसंद थीं। ऐसे में कुछ लोग वन से वन-उपज ला कर गाँव के लोगों को बेचते थे या उनका लेन-देन करते थे। वन-उपज बेचने या उसका लेन–देन करने वाले ही वणिक /वनिये /बनिये कहलाए होंगे (वन > वणिक > वाणिज > वनिय > बनिया। इन वणिकों में भी विभिन्न लोग वन से वस्तु-विशेष लाने में विशेषज्ञता रखने लगे होंगे। इसी वस्तु-विशेष में विशेषज्ञता के कारण बनिया जाति की उप-जातियाँ बनी होंगी, जैसे बांस वाला बांसल /बंसल, मधु वाला मधुकुल/ मुद्गल। वन से लाकर मोठ बेचने वाले या उसका लेनदेन करने वाले वनिये मोठी कहलाए होंगे, और फिर मोठी से मोढी और मोदी। 

मोठ का नामकरण :- लेकिन मोठ का नाम मोठ क्यों पड़ा? प्राचीन काल में जब हमारे पुरखे नए–नए खाद्य पदार्थों की पहचान और उनका नामकरण कर रहे थे, उन्होने कंद-मूल-फल-अन्न का नामकारण उनके स्वाद, आकार या अन्य गुणों पर किया होगा। इस ब्लॉग में हम आम, मटर, pea, मूंग, मसूर, मोठ, टमाटर, चावल, नारियल, आदि के नामकरण की चर्चा कर चुके हैं; जैसे मधुर > मटुर मटर। इसी क्रम जब मोठ के पौधे की खोज हुई तो पुरखों ने पाया कि यह मीठी फली मनुष्यों को भी पसंद है और पशुओं को भी। मिठास के कारण इसका नाम हुआ :- मिष्ठ > मोष्ठ > मोष्ठक (लुप्त संस्कृत) > मुकुष्ट  (संस्कृत) > मोष्ठक > मोठिके > मोडिके (कन्नड़)। मोष्ठ > मोठ > मुट/ मठ (गुजराती)। मोठ को बिना पकाये खाया जा सकता है क्योंकि पानी में भीगने के कुछ ही देर में मोठ नरम और अंकुरित हो जाता है। अतः यह भारतीय मूल का पौधा मानव इतिहास में सबसे पहले उपयोग में लाये जाने वाले अन्न / दाल में से एक रहा होगा। 

मोदी और मोदक -- कुछ विद्वानों का मत है कि मोदी शब्द मोदक (=लड्डू) से  बना, अतः मोदी हलवाई थे। किन्तु मुझे लगता है कि संसार का पहला मोदक बनाने के लिए मोष्ठक या मोठ का प्रयोग किया गया होगा। अतः मोठ से मोदक। यह कल्पना मोठ के इस गुण पर आधारित है की इसे बिना पकाये खा सकते हैं। कच्ची भीगी मोठ में कोई मीठा रस मिला कर संसार का पहला मोदक बना होगा। आज मोठ के तो नहीं किन्तु मूंग, उड़द और चने के मोदक काफी लोकप्रिय हैं।  अतः मोठ से मोदी, मोठ से मोदक; मोदक से मोदी नहीं।     

मोदी, मद्द, मद, ग्रॉसर  


सभी जातियों में केवल बनिये या मोदी ही अपना लेन-देन का हिसाब बही-खातों में रखते थे, इन बहियों में अन्य मोदियों से लेनदेन का हिसाब विभिन्न कॉलम में लिखा जाता था। प्रत्येक मोदी का एक अलग कॉलम होता था। यहीं से तालिका के कॉलम को मद (मोदी > मद) या मद्द (अरबी) कहा जाने लगा होगा। समाज द्वारा कृषि अपनाने के बाद जिन बनियों ने केवल मोठ ही नहीं अपितु सभी कृषि उत्पादों के लेन-देन का व्यवसाय किया वे कृषिर कहलाए होंगे और उससे ग्रॉसर (कृषिर > गृशिर > ग्रोशर > ग्रॉसर (grocer)। तो इस तरह मोदी लोग ग्रॉसर कहलाए होंगे। हिन्दी-अङ्ग्रेज़ी कोशों  में मोदी का अर्थ ग्रॉसर ही है (शब्दकोश में ग्रॉसर का उत्स ग्रोस (gross) या थोक व्यापार से बताया गया है)। 

घाञ्ची-मोढी  
बाद में कुछ मोदियों या ग्रॉसरों ने केवल वनस्पति तेल निकालने और बेचने का काम अपनाया। प्राचीन काल में, कोल्हू के आविष्कार से पहले, तेल निकालने के लिए तैलीय बीजों को घन या मुद्गर से पीटा जाता था, और उसकी पिट्ठी को निचोड़ कर तेल निकाला जाता था। अतः घन से पीट कर बीजों से तेल निकालने वाले तेली घाञ्ची-मोदी (घन > घाञ्ची) कहलाये। घन से पीट कर निकाला गया तेल घानी तेल कहलाया। बाद में कोल्हू का आविष्कार होने पर मनुष्य ही उसमें पशु कि तरह जुत कर तेल निकालता था। कोल्हू के मशीनीकृत होने के बाद भी कोल्हू से निकले तेल हो घानी तेल ही कहते हैं और निकालने वाले को घाञ्ची।  भारत में जाति के ऊँच-नीच के क्रमिक वर्गीकरण का आधार उसका क्रमशः बुद्धिजीवी, बलजीवी, व्यवसायजीवी और श्रमजीवी होना था। यूँ तो घाञ्ची-तेली-मोदी की मूल जाति वन-उपज का व्यवसायी होने के कारण बनिया थी, किन्तु तेल निकालने का श्रमसाध्य काम करने के कारण वे निचले पायदान पर बनियों और शूद्रों के बीच की अन्य पिछड़ी जातियों में चले गए होंगे।     

मोदी शब्द के उत्स पर एक मत यह भी :- 

मोदी शब्द के उत्स पर अजित वडनेकर जी के दो बहुत ही शोधपूर्ण लेख उनके ब्लॉग पर उपलब्ध हैं। (1. मोदी की जन्मकुंडली 2. मोदीख़ाना और मोदी)। उनका कहना है कि भाषाविद् मोदी शब्द के उत्स पर एकमत नहीं है। मोदी शब्द का रिश्ता संस्कृत के मोद (आनंद), मोदक (लड्डू) और यहाँ तक की हलवाई से भी जोड़ा गया है। उनके अनुसार मोदी शब्द सेमेटिक धातु मीम-दाल-दाल (م د د ) यानी m-d-d  या मद्द (=आपूर्ति, सहायता) पर आधारित है। अरबी में बहीखाते के कालम को मद्द कहते हैं, जिससे हिन्दी का मद बना। अतः बही खाता रखने वाले ही मोदी हुए। इस तरह वडनेकर जी का मानना है कि मोदी शब्द हिन्दी में मध्यकालीन मुस्लिम दौर में सैन्य शब्दावली से आया है।  


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मैंगो पीपुल, आम आदमी, और कामन मैन Mango People, AAM AADAMI, and Common Man 


Friday, May 09, 2014

दामाद श्री, जमाई जी

समधी और दामाद शब्दों में भी पिता-पुत्र का रिश्ता !

आजकल दामाद श्री की चर्चा है। दामाद पुत्री के पति को कहते हैं। यहाँ दामाद के साथ श्री आदरसूचक न हो कर व्यंग का पुट लिए है। कैसी सांस्कृतिक विडम्बना है कि कई बार मधुर संबंधो को बताने वाले शब्द भी व्यंग या गाली का रूप ले लेते हैं! इस तरह के शब्दों में दामाद ही नहीं, विवाह के कारण बनने वाले अन्य रिश्ता-सूचक शब्द भी हैं, जैसे सास, ससुर, और साला। साला तो गाली के रूप में प्रचलित है ही। माना जाता है कि दामाद शब्द फारसी से हिन्दी में आया। विद्वानों के अनुसार संस्कृत में दामाद के लिए जामातृ शब्द है जो बिगड़ कर हिन्दी में यामाता / जामाता, जमाई, जवाईं, ज्वाईं हो गया। जावई (मराठी) और जवें (गढ़वाली) भी इसी क्रम में आते हैं। जामातृ से ही फारसी का दामाद बना:- जामातृ > जामातर (अवेस्ता) > जामात > दामात > दामाद (फारसी) जो ईरान से लौट कर फिर भारतीय भाषाओं में उसी अर्थ में लौट आया। जामातृ से ही तुर्की में दामादर बना (जामातृ > दामातृ > दामातर > दामादर) और ग्रीक में जमितर (जामातृ > जामातिर > जमितर)। लेकिन प्रश्न है कि संस्कृत का जामातृ कहाँ से आया? श्री अजित वडनेकर के अनुसार एक मत यह भी है कि संस्कृत शब्द जामा (पुत्री) से ही जामाता / जामातृ बना। उनका कहना है कि जामा शब्द संस्कृत के जा = संतान और मा = निर्माण से मिल कर बना। अतः  जामा = सन्तान बनाने वाली; और जामा से जामाता। उनका अनुमान यह भी है कि संस्कृत शब्द जामा का तात्पर्य भोजन बनाने वाली यानी पत्नी से है क्योंकि जम् धातु का अर्थ भोजन है। 

हमने पहले चर्चा की है कि वैवाहिक बंधन से जुड़े अनेक शब्द बंध शब्द पर आधारित हैं (वेलेंटाइन, वेड्डिंग, वेलेंसी, बॉण्ड, हस्बेंड, पति, पत्नी, बींध और बींधनी)क्या दामाद और समधी शब्दों का इस नाता बंध शब्द से है? वास्तव में, समधी यानी दामाद का पिता, संस्कृत के सम्बन्धिन / सम्बन्धी का ही सरल रूप है। सम और बंधिन को मिला कर बने शब्द  सम्बन्धिन का अर्थ है आपस में बंधे हुए। कभी सम्बन्धिन शब्द विवाह से बने सभी रिश्तों के लिए था किन्तु अब इसके प्रचलित रूप समधी और समधिन क्रमशः पुत्री के ससुर और सास के लिए ही प्रयोग होते हैं। मालवा में दामाद के परिवार के प्रत्येक पुरुष को ब्याई और प्रत्येक स्त्री को ब्याण कहते हैं। समधी और दामाद में पिता पुत्र का नाता है परंतु भाषाविदों का कहना है समधी और दामाद शब्दों का आपस में कोई नाता नहीं है! भाषाविद् जामातृ और सम्बन्धिन शब्दों में भी कोई आपसी रिश्तेदारी नहीं मानते। लेकिन अगर हम संबन्धित शब्दों को जैविक डी.एन.ए. की तरह की परखेँ तो समधी और दामाद शब्द में भी पिता-पुत्र का संबंध उजागर होता है।  
सम्बन्धी > समधी > जमधी > जमती > जमता > जामाता > जामातृ
संयुक्त रूप में पति और पत्नी के लिए संस्कृत शब्द दम्पति भी सम्बन्धी का ही बिगड़ा रूप है:  
सम्बन्धी > जम्बन्धी > जम्बधी > जम्पति > दम्पति

आपको याद होगा कि हमने चर्चा की थी कि अङ्ग्रेज़ी का शब्द हस्बन्ड (husband) भी संस्कृत के सहबंध का ही सरल रूप है। शायद आज आप उस चर्चा को दोबारा पढ़ना चाहेंगे।  
Valentine, wedding, valency, bond, husband, PATI, PATNI, BEENDHand BEENDHANI वेलेंटाइन, वेड्डिंग, वेलेंसी, बॉण्ड, हस्बेंड, पति, पत्नी, बींध और बींधनी

चलते-चलते कुछ पाजी व्युत्पत्तियाँ 

  • "ससुराल में बैठकर जीमने वाला जीमता या जामाता ही कहलाएगा"। (सलिल वर्मा जी से साभार)
  • ससुराल प्रवास के दौरान अधिक खा कर सारा दिन जम्हाई लेने वाले को जमाई कहते हैं! 
  • ससुराल प्रवास में पत्नी बार-बार अङ्ग्रेज़ी में कहती है : "डैम'एड, बिहेव योरसेल्फ" (गंदे आदमी अपना व्यवहार ठीक रखो)। दामाद शब्द  पत्नी द्वारा बार-बार कहे गए डैम'एड का ही रूप है!   
  • ससुराल प्रवास में अगर ठीक खातिर न हो, तब गुस्से से फूँ-फाँ करने वाले को साले के बच्चे 'फूफा' कहते हैं!  

Monday, April 28, 2014

सरकार शब्द कहाँ से आया?

क्या फ़ारसी मूल के सरकार का संस्कृत से पुराना नाता है?


नमस्ते मित्रों। पूरे एक वर्ष के बाद ब्लॉग पर वापस आया हूँ। आशा है कि इस लंबी अनुपस्थिति के लिए आप क्षमा करेंगे। रुकी हुई यात्रा को आज फिर से शुरू करते हैं। चारों ओर नई सरकार के लिए चुनाव की चर्चा है। अतः आज देखते हैं कि सरकार शब्द कहाँ से आया? शब्दकोशों के अनुसार सरकार फ़ारसी मूल का शब्द है। ऐसा माना जाता है कि मध्यकाल में ईरानियों के आक्रमण के समय ही यह फ़ारसी शब्द भारत आया। फ़ारसी और हिन्दी में सरकार के प्रचलित अर्थ हैं: 1. राज्य संस्था, शासन-सत्ता (गवर्नमेंट), हुकूमत। 2. प्रशासनिक इकाई। 3. रियासत। 4. राज दरबार। 5. पालक, प्रभु। 6. घर का मालिक। हम सभी जानते हैं कि फ़ारसी भाषा भारोपियाई भाषा परिवार की ही पुत्री है। अतः सरकार का उत्स खोजने के लिए हमें संस्कृत में इसका निकटतम शब्द खोजना होगा। संस्कृत में राजसत्ता और ऐश्वर्य के लिए एक शब्द श्री भी है। लक्ष्मी का एक नाम श्री है और विष्णु का एक विशेषण श्रीकर: है। क्या सरकार शब्द का नाता भगवान विष्णु के विशेषण श्रीकर: से है? (श्रीकर: > शिरकर > सिरकार > सरकार)। हम यह भी जानते हैं कि प्राचीन काल से ही राजा को धरती पर भगवान का प्रतिनिधि माना जाता था। नेपाल के राजा को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता रहा है। भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम थे। आज भी थाईलैंड के राजा को राम कहा जाता है। मध्यकाल में और अँग्रेज़ों के काल में सरकार के लिए सिरकार का प्रयोग भी खूब होता था। किन्तु अब केवल सरकार ही चलन में है।
अब सरकार शब्द के एक और संभावित सगे-संबंधी पर विचार करें। भारत में सरकारी पत्रों के लिहाफ़ों पर O.I.G.S. छपा रहता है: O.I.G.S. का पूरा रूप है: ON INDIA GOVERNMENT SERVICE  या भारत सरकार की सेवा पर। ब्रिटिश सरकार के लिफ़ाफ़ों पर छपा होता है: O.H.M.S. या ‘ON HER MAJESTY’S SERVICE’ अर्थात महारानी की सेवा पर। अब अगर श्री का अर्थ राजसत्ता है तो राजसत्ता की सेवा यानी सरकारी काम के लिए संस्कृत शब्द होना चाहिए: श्रीकार्य (श्री + कार्य)। मुझे श्रीकार्य शब्द किसी संस्कृत कोश में नहीं मिला। क्या यह हो सकता है कि श्रीकार्य संस्कृत से लुप्त हो गया किन्तु फ़ारसी में सरकार/ सरकारी के रूप में बना रहा (श्रीकार्य > शिरकारय > सिरकार > सरकार)?  आप क्या सोचते है?

चलते-चलते एक सुनी-सुनाई बात (श श s s s s s.. केवल मेरे और आपके बीच में): मैंने सुना भारत सरकार के धीमे कामकाज से परेशान कुछ लोग आपस में बातें कर रहे थे: “सरकार को सरकार इसलिए कहते हैं क्योंकि वह सरक-सरक कर चलती है।”  

Sunday, April 28, 2013

मोहनजोदारो के मेलूहा The Meluha of Mohenjo Daro


The english version 'The Meluha of Mohenjo Daro'  is given at the end of this article. 

 मोहनजोदारो के मेलूहा

अमीश त्रिपाठी ने 'मेलूहा के मृत्युंजय' (The Immortals of Meluha) और इसी क्रम के दो और उपन्यास लिखे हैं। दो वर्षों में, इन तीन पुस्तकों की 15 लाख प्रतियाँ बिकी हैं। यह भारत में अभी तक सबसे तेजी से बिकने वाली पुस्तक का कीर्तिमान है। अमीश के उपन्यास की पृष्ठभूमि में प्राचीन भारत के मोहनजोदारो, हड़प्पा और अन्य नगरों के जीवन का काल्पनिक चित्रण है। अमीश ने प्राचीन मोहनजोदारो क्षेत्र के निवासियों के लिए मेलूहा शब्द का प्रयोग किया है। 
मेलूहा बहुत प्राचीन शब्द है। प्राचीन सुमेर देश (आज का इराक़) के साहित्य में वर्णन है कि वे लोग मेलूहा देश से व्यापार करते थे। यूं तो कोई भी पक्की तरह नहीं कह सकता कि यह मेलूहा कौन सा देश था, कहाँ था, किन्तु अनेक विद्वानों कि राय है कि सुमेर (इराक़) देश के लोग सिंधु-सरस्वती सभ्यता को ही मेलूहा ही कहते थे।  अगर यह सच भी है तब भी यह बात उल्लेखनीय है कि शायद अमीश से पहले कभी किसी भारतीय ने अपने ही देशवासियों के लिए मेलूहा शब्द का प्रयोग नहीं किया था। 

अगर सिंधु सभ्यता का भारत ही मेलूहा था, तब भी कोई यह नहीं जानता कि सुमेर के लोग हम भारतीयों को मेलूहा क्यों कहते थे, या फिर इस शब्द का अर्थ क्या था ? अनेक अटकलें लगाई गईं है। एक अटकल यह है कि सुमेरी लोग भारत से तिल का तेल मंगाते थे, तेल को सुमेरी में एल्लू कहते है (तिल को भी दक्षिण भारत की भाषाओं में एल्लू कहते हैं); अतः एल्लू और मेलूहा की आपस में रिश्तेदारी है। लेकिन सुमेरी लोग तो भारत से तेल के अतिरिक्त और भी अनेक वस्तुएँ मंगाते थेफिर मेलूहा शब्द के उत्स में विद्वानो का जोर तेल पर ही क्योंएक यूरोपियन विद्वान तो यहाँ तक कहते है कि मेलूहा शब्द ही बाद में मलेच्छ शब्द में बदल गया। यह समझ पाना कठिन है कि सप्तसिंधु के लोग स्वयं को ही मलेच्छ कहने लगे थे!   

मुझे लगता है कि मेलूहा शब्द के उत्स का रहस्य इस बात में छिपा हो सकता है कि इराक़/ ईरान के लोग हमें सिंधु सभ्यता के बाद के काल में क्या कहते थे, या हम उन्हें क्या कहते थे? अब यह बात सभी जानते हैं कि प्राचीन काल से हम अपने को भारत कहते आए हैं। भारत नाम अनेक प्राचीन ग्रन्थों में है। किन्तु हमारे पश्चिम में सिंधु नदी के पार रहने वाले सुमेरी (इराक़ी), ईरानी, अरब हमें हिन्दू कहते थे। यूं तो वे हम सिंधु-पार के लोगों को 'सिंधु' ही कहना चाहते थे पर क्योंकि वे '' को '' बोलते थे, अतः सिंधु को हिन्दू कहते थे। उनसे भी पश्चिम में यूरोप के लोगों ने हिन्दू शब्द को ही इंदू कहा, जिससे बना इंदिया या इंडिया।  जब सिंधु-पार के  लोगों ने हम पर राज किया तो उनकी तरह हमने भी अपने को हिन्दू कहा। जब यूरोपियन हम पर राज करने आए तब हम भी उनकी तरह स्वयं को इंडियन कहने लगे। 

सिंधु-सरस्वती के मैदानों में रहने वाले लोग पश्चिम के देशों से व्यापार के लिए समुद्र मार्ग से जाते थे और इस यात्रा में सबसे पहले आने वाले पड़ोसी देश के लिए शायद 'पार्श्व' (=निकट) शब्द का प्रयोग करते होंगे। पार्श्व बिगड़ कर पार्श्व > पारशव > पारसय > पारसी > फारसी हो गया होगा।  इसी क्रम में पूर्व दिशा के लोग पूर्वी कहलाए होंगे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को आज भी पूरबिये कहलाते हैं। कल्पना कीजिये  कि अगर सुमेरी लोग हमें पूर्वी कहते हों तब यह शब्द कैसे बिगड़ा होगा: पूर्वी > पूल्वी > मूल्वी > मेल्यी > मेलही > मेलूहा ! या शायद सुमेरी लिपि की अपूर्णता के कारण ही हम लिखे हुए पूर्वी को मेलूहा पढ़ते है

आपको यह कल्पना कैसी लगी?  

The Meluha of Mohenjo Daro

Amish Tripathi’s ‘The Immortals of Meluha’ and the two other novels of his Shiva-trilogy have created history. The three books have sold 1.5 million copies in the last two years and have become the fastest selling books in the history of book publishing in India. Amish’s story is set in ancient India’s Mohenjo-daro, Harappa and other places and depicts their imaginary life. Amish has used the term Meluha for Mohenjo Daro.  Meluha is a very ancient word. According to the ancient texts of the Sumer civilisation (Iraq) they had trade ties with Meluha.
If Meluha was indeed the India of the Indus civilization, we have no idea as to why the Sumerians gave us that name. Many scholars have speculated about the meaning of Meluha. According to one theory, the Sumerians imported sesame oil from India; sesame oil, is called ELLU in Sumerian (sesame is also known as ELLU in South Indian languages); therefore ELLU and MELUHA are related words. It is difficult to understand why the Sumerians would have called us MELUHA on the basis of oil alone while they imported a very large number of articles from India. A European scholar has gone to the extent of suggesting that the word MALECHCHH used in Sanskrit for barbaric and uncouth is a variation of MELUHA. It is difficult to understand as to why the people of Sapta-Sindhu would use the word MALECHCHH  (barbarian, outcast) if it was meant to used for them!
It is well known that we, the people of India called ourselves BHARAT since time immemorial.  The name BHARAT is found in many ancient Indian texts. However, the Sumerian, the Iranians, and the Arab, all living in the west across the river Sindhu used to call us Hindu. This is because while they wanted to call us ‘Sindhu’ they called us Hindu due to their habit of pronouncing ‘s’ as ‘h’. The Europeans pronounced Hindu as Indu and that is how they called us Indu or Indian. When the people from across the Sindhu/ Indus came and ruled us, we stated calling ourselves as Hindu.  When the Europeans occupied India and started ruling us , we learned to call ourselves India.

Imagine the scenario of the Saraswati-Indus traders sailing to the west in the times of Mohenjo Daro. They might have called the people of the first / the neighbouring port by the Sanskrit word  ‘PARSHVA’ or the ‘nearby’ people. The word PARSHVA might have changed from Parshva> Parasya> Parsi> Persian/FARSI. They might have called the people living in the east of Mohenjo Daro as POORVI (Sanskrit, eastern). Even today, the people of the western Uttar Pradesh, call the people of the eastern Uttar Pradesh as POORABIA (the eastern).  Imagine the Sumerian calling the Mohenjo Daro people as POORVI. If so, the word POORVI might have transformed into MELUHA in the following way: POORVI > Pulvi> Mulvi> Melyi> Melhi> Meluha! Another possibility: they called us POORVI but due to the imperfect nature of the script they wrote POORVI as MELUHA?
How did you find this flight of imagination? 

Sunday, March 17, 2013

ख़लीफ़ा शब्द का संस्कृत समानार्थी The Sanskrit Synonym of the Word ‘Caliph’



ख़लीफ़ा अरबी भाषा का शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ उत्तराधिकारी या वारिस माना जाता है। किन्तु इस शब्द का प्रयोग केवल पैग़म्बर मोहम्मद के उत्तराधिकारीके लिए किया जाता है। मोहम्मद साहब के देहांत के बाद हज़रत अबु बक्र अरब के पहले ख़लीफ़ा  बने। बाद में,  बगदाद (1258 ई॰ तक) और तुर्की (1571 ई॰ से 1924 ई॰ तक) के शासक भी ख़लीफ़ा कहलाए। ख़लीफ़ा के कई अन्य अर्थ भी प्रचलित हो गए, जैसे उप-राजा, राज्यपाल, प्रतिनिधि, कार्यवाहक, प्रजापालक। कुरान मजीद में पहली बार सूरा 2/30 में अल्लाह द्वारा  ख़लीफ़ा नियुक्त करने की इच्छा का वर्णन है। इसलिए कुछ लोग ख़लीफ़ा को अल्लाह का वारिस या उत्तराधिकारी भी मानने की भूल करने लगे। भक्तों को विश्वास हैं कि अल्लाह को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं हो सकती क्योंकि अल्लाह की सत्ता हर समय और हर जगह है। यूं भी किसी भी मानव में अल्लाह के प्रतिनिधि होने की योग्यता का पाया जाना असंभव है। मोहम्मद साहब भी अल्लाह के केवल प्रवक्ता थे, कोई उत्तराधिकारी या प्रतिनिधि नहीं। प्रथम ख़लीफ़ा हज़रत अबु बक्र भी स्वयं को अल्लाह या पैग़म्बर  का उत्तराधिकारी या प्रतिनिधि न मान कर, केवल प्रजापालक मानते थे। अतः ख़लीफ़ा शब्द का उचित भावनात्मक अर्थ प्रजापालक ही है। इसमें पालन करने का कर्तव्य निहित है, सत्ता का अधिकार नहीं। यह इस्लाम की समता-मूलक समाज की मूल कल्पना के अनुरूप है।

लेकिन यह अरबी शब्द ख़लीफ़ा आख़िर कहाँ से आया? भाषाविद् अरबी और संस्कृत में कोई संबंध नहीं मानते।  किन्तु अगर हम संस्कृत सभी भाषाओं की जननीके सिद्धान्त  पर विचार करना चाहें तो हमें ख़लीफ़ा शब्द से मिलता-जुलता और समान अर्थ वाला शब्द संस्कृत में खोजना होगा। अगर ख़लीफ़ा शब्द का मूल रूप, अर्थ और भाव पालकरहा होगा तब तो संभव है कि पालक शब्द उच्चारण भेद से फ़ालक और फ़ालख़  बन गया होगा; और शब्द की मोतीमाला बिखर कर फिर जुड़ने से फ़ालख़  का ख़लफ़ा और उससे ख़लीफ़ा बन गया होगा।     
पालक > फ़ालक > फ़ालख़ > ख़लफ़ा > ख़लीफ़ा।

लेकिन, अगर ख़लीफ़ा शब्द को केवल वारिस के अर्थ में देखें, तब संस्कृत शब्द कुलदीपइसके अधिक निकट बैठता है:
कुलदीप > खलदीफ़ > खलजीफ > खलयीफ > ख़लीफ़ा।   
(संस्कृत में द से ज और ज से य में बदलाव के अनेक उदाहरण हैं; जैसे द्युति >ज्योति , प्रद्योत>प्रज्योत; राजा > राया  

The word Caliph is derived from the Arabic word khalifa. It literally means successor or heir. However, in practice, the word Caliph is used only for successors of the Prophet Mohammed.  Hazrat Abu Bakr became the first caliph of Arabia after the death of Prophet Mohammed. Later, the rulers of Baghdad (until 1258 AD) and Turkey (from 1571 until 1924) were also called the caliph. Some more meanings got associated with the word Caliph, e.g. viceroy, governor, representative, officiating, and guardian of the people. Allah’s wish to appoint a caliph is mentioned for the first time in the holy Koran in Sura 2/30. Therefore, some people make the mistake of believing the Caliph to be the successor to God. The faithful believe that the God doesn’t need to appoint His successor because He is present everywhere and at all times. Moreover, no human being can possess the merit to qualify as His representative or successor. Even the Prophet Mohammed was only a spokesperson rather than a successor or representative of Allah. Hazrat Abu Bakr, the first caliph, considered himself to be a guardian of the people rather than a successor or representative of Allah or the Prophet. The word ‘guardian’ conveys the most appropriate sentiment of the word Caliph as it conveys a sense of duty but not of power. This concept is in conformation with the original concept of an egalitarian society envisaged in Islam.
 Let us consider the origin of the Arabic word khalifa. The linguists don’t believe in any relationship between Arabic and Sanskrit. However, if we consider the theory that Sanskrit is the mother of all languages, we will have to search for a similar sounding Sanskrit synonym of khalipha. If the Arabic word khalipha ​was meant to convey the sense of a guardian, we may consider its Sanskrit equivalent ‘paalak’ as a potential candidate. Paalak may have mutated to phaalak and   phaalakh that may have changed to khaalaph to khalipha by change of sequence of letters.   
paalak > phaalakh > khalaph > khalipha
 However, looking at ‘khalipha’ strictly in terms of its meaning as a successor, this word is nearer to the Sanskrit word ‘kuladeep’ (literally light of the family, meaning thereby the son who is a successor).
 kuladeep > khalajeeph > khalayeeph > khalipha.
The mutation from d > j and j > y is common in Sanskrit, e.g. dyuti> jyoti, pradyot > prajyot; raja > raya.      



यह लेख भास्कर समूह की पत्रिका अहा! ज़िंदगी के अप्रैल 2005 अंक में छपे मेरे पुरस्कृत लेख का ही संवर्धित रूप है।    
This write up is based on a prize winning article by me published in the April 2005 issue of the magazine ‘AHA! ZINDAGI’ of the Dainik Bhaskar Group.


Thursday, October 18, 2012

लेटिन कानूनी शब्द 'सुओ मोतु' की संस्कृत में रिश्तेदारी Sanskrit Relationship of Latin Legal Term 'Suo Motu / Moto '

Note: The English Version of this article is given at the end of the article in Hindi 

अन्याय से भरपूर इस जगत में एक नियम सभी देशों में लागू है कि जब तक कोई व्यक्ति अन्याय की शिकायत नहीं करता, तब तक आरोपी पर न्यायालय में मुकदमा नहीं चल सकता। हम सभी जानते हैं कि आजकल भारत में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के कार्यकर्ता मुकदमे चला कर न्याय पाने के लिए के लिए कितना संघर्ष  कर रहें हैं। लेकिन कभी-कभी ऐसा भी हो जाता है कि शिकायत के बिना ही मुकदमा चल जाता है, या बिना मुकदमे के ही न्यायधीश आदेश सुना देते हैं। ऐसा तब होता है जब अपराध की किसी संगीन घटना से न्यायधीश इतना विचलित हो जाते हैं कि उन्हें लगता है कि शिकायत किए जाने की प्रतीक्षा करना भी भारी अन्याय होगा। उदाहरण के लिए, अभी पिछले सप्ताह, दिल्ली उच्च न्यायालय ने अखबार में छपी एक खबर का बिना शिकायत के ही संज्ञान लिया। खबर थी कि दिल्ली के लोधी उद्यान में बहुत से घूँस (मोटे चूहे) उद्यान को हानि पहुँचा रहे हैं। चूहों के साथ ही, न्यायालय ने बिना किसी छपी खबर के ही अपनी ओर से लोधी उद्यान में आवारा कुत्तों की आवारगी का भी संज्ञान लिया और नई दिल्ली नगर पालिका को चूहों और कुत्तों के खिलाफ आदेश दे डाला। वह और बात है कि श्रीमति मानेका गांधी के हस्तक्षेप के बाद न्यायालय ने प्यारे आवारा कुत्तों के खिलाफ क्रूरता-भरा आदेश एक सप्ताह बाद वापिस भी ले लिया। 


न्यायालय या किसी अन्य अधिकारी द्वारा इस तरह घटना का स्वयं ही संज्ञान लेने को कानूनी भाषा में 'सुओ मोतु' या 'सुओ मोतो' (suo motu/ moto) कहते हैं। 'सुओ मोतु' लेटिन भाषा का शब्द हैं जिसका शाब्दिक अर्थ है 'अपने आप करना'। 

एक मत के अनुसार संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है, लेटिन की भी। तो फिर संस्कृत में 'सुओ मोतु, के लिए क्या शब्द है? स्व = अपना, और  मति = बुद्धि, चेतना। अतः  मुझे लगता है कि न्यायधीश का 'स्व मति' द्वारा निर्णय को ही लेटिन में उच्चारण भेद के चलते 'सुओ मोतु' कहते हैं। 

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Sanskrit Relationship of Latin Legal Term 'Suo Motu / Moto'

In this world full of injustice, a rule is observed universally that a law suit cannot commence in  a court of law unless someone makes a formal complaint.  We all know about the struggle of India's anti-corruption activists to file anti-corruption cases in courts. However, do you know that occasionally, trial may take place and the judgement announced even without anyone making any complaint. This may happen when a judge is overwhelmed by the gravity of a crime that he/she feels it unnecessary to wait for filing of formal complaint. He/shes takes the cognizance of the event and initiates proceedings on his/her own. For example, last week, the Delhi High Court took cognizance of a news report about damage to Delhi's Lodhi Gardens by the bandicoots (a type of big rats). The court on its own also took cognizance of the menace of stray dogs in Lodi Gardens and ordered the New Delhi Municipal Committee to take steps against dogs and bandicoots. (However, within a week, the animal rights activists Mrs. Maneka Gandhi intervened on behalf of the very dear stray dogs, and the high Court withdrew its (cruel) order against the dogs. 

When a court or any other authority takes cognizance of an event on its own, it is called "Suo Motu / Moto' in legal terms. "Suo Motu is a Latin term that literally means 'on its own motion'. 


According to one theory Sanskrit is the mother of all languages including Latin. What would be the Sanskrit equivalent of Latin 'suo motu'? 


The Sanskrit words SWA स्व + MATI   मति foot the bill. SWA स्व mean self and MATI मति  means wisdom or consciousness. Thus SWA MATI  स्व मति of Sanskrit seem to the 'suo motu' of Latin with minor variations of pronunciation. 


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Monday, October 15, 2012

मैंगो पीपुल, आम आदमी, और कामन मैन Mango People, AAM AADAMI, and Common Man


Note: The English Version of this article is given at the end of the article in Hindi 

कुछ दिन पहले, सोनिया जी के दामाद राबर्ट वाड्रा ने अपने फेसबुक स्टेटस पर लिखा: 'मैंगो पीपुल इन अ बनाना कंट्री' (mango people in a banana country).  इससे उपजे विवाद के कारण यह अभिव्यक्ति 'मैंगो पीपुल' भारत में हर किसी की जुबान पर है। कौन जाने, 'मैंगो पीपुल' को,  इसके बढ़ते हुए प्रयोग के कारणजल्दी ही 'ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी' में 'कॉमन मैन' के पर्यायवाची के रूप में शामिल कर लिया जाए! 

पर यह 'मैंगो पीपुल" कहाँ से आया? सबसे पहले इसका प्रयोग किसने किया? इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए अभी और रिसर्च करनी होगी। किन्तु एक बात तो पक्की है कि आम आदमी के लिए 'मैंगो पीपुल' की अभिव्यक्ति राबर्ट वाड्रा के दिमाग की उपज नहीं है। लेकिन हाँ, 'मैंगो पीपुल' से उनकी कुछ रिश्तेदारी जरूर बनती है।

कई वर्षों से, राबर्ट की सासू-माँ सोनिया जी की पार्टी, चुनाव के समय उनकी फोटो के साथ एक नारा लगाती आयी है: "कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ"।  देश में बहुत लोगों को यह नारा विश्वसनीय नहीं लगता। वे अपने तरीके से इसका विरोध करते आए हैं। आजकलजब अरविंद केजरीवाल कॉंग्रेस सरकार का विरोध करते हैं, तब,  टोपी पर "मैं हूँ आम आदमी" लिख कर निकलते हैं। इसमें उनका साफ उद्देश्य होता है -- कॉंग्रेस के आम-आदमी वाले नारे की खिल्ली उड़ाना। इंटरनैट पर भी कॉंग्रेस के इस नारे की खिल्ली उड़ाने वाले लेखों और कार्टूनों की कोई कमी नहीं है। इनमें से कई लोग आम आदमी को 'मैंगो मैन' ही कहते हैं। अपने आप को भी 'मैंगो मैन' कहने वाले कई लोग साइबर दुनियाँ में कई वर्षों से मौजूद हैं। लेकिन केजरीवाल द्वारा लगाए भ्रष्टाचार के आरोपों से तिलमिलयाए हुए राबर्ट वाड्रा जब फेसबुक पर तिरस्कार से भरा 'मैंगो पीपुल लिख रहे थे, तब साफ तौर से उनका निशाना 'मैं हूँ आम आदमी' वाली टोपी पहने अरविंद केजरीवाल ही थे। 

यह कहने की कोई आवश्यकता नहीं हैं कि हिन्दी शब्द 'आम' दो अर्थों में जाना जाता है: 1. अरबी भाषा से हिन्दी में आया शब्द आम = साधारण, मामूली, जनसाधारण, जनता; अँग्रेज़ी में कॉमन common; 2. हिन्दी का मूल शब्द आम = फलों का राजा आम, जिसे अँग्रेज़ी में मैंगो mango कहते हैं; और यह भी कि 'मैंगो पीपुल' कह कर मज़ाक बनाने वालों ने आम के पहले अर्थ के स्थान पर दूसरे अर्थ का अँग्रेज़ी अनुवाद किया था। इस ब्लॉग में आप आम के दूसरे अर्थ यानी 'फलों का राजा आम' पर एक लेख पहले ही पढ़ चुके हैं (How mango might have got its names आम का नामकरण कैसे हुआ होगा)आज हम चर्चा करेंगे पहले अर्थ की, और उसी अर्थ लिए हुए अँग्रेज़ी शब्द कॉमन common की। 

मेरे विचार से, संस्कृत शब्द 'सम' पहले अरबी भाषा में गया होगा और बिगड़ कर 'आम' बना होगा। फिर लौट कर, उसी बिगड़े हुए रूप में फारसी, उर्दू के रास्ते हिन्दी में शामिल हो गया! संस्कृत में सम का अर्थ है: एक जैसा, समान, सामान्य, मामूली। संस्कृत वर्ण श/ष/स/ फारसी, अरबी, तुर्की में बदल कर '' हो जाते हैं। ग्रीक/यूनानी तक पहुँचते हुए यही स से ह हुई आवाज आ या ई में बदल जाती है।  इस परिवर्तन का सबसे जाना पहचाना उदाहरण है: सिंधु> हिन्दू > इन्दु> इंडिया; या सिंधु > इंडस। अतः,  सम के आम में बिगड़ने की क्रिया कुछ इस तरह रही होगी: सम >साम> हाम > आम।

अब देखें कि अँग्रेज़ी में कॉमन शब्द कहाँ से आया? भाषाविदों के अनुसार समान या सामान्य के लिए लेटिन शब्द कोम्युनिस है। उसी से फ़्रेंच शब्द कोम्युन बना। जिससे 1250-1300 ई॰  के आसपास अँग्रेज़ी शब्द कोमुन बना, जिसे हम आज कॉमन के रूप में जानते है।

लेकिन, क्यों न हम लेटिन शब्द कोम्युनिस और उससे बने अँग्रेजी शब्द कॉमन का उत्स संस्कृत के शब्दों सम/ समान/ सामान्य में ही खोजें ? संस्कृत की '' ध्वनि यूरोपियाई भाषों में अनेक बार '' में बदल जाती है, जैसे  सह > को; समिति > कमेटी। अतः सम से कॉमन की यात्रा कुछ इस रही होगी: 
सम > समान > सामान्य > चामान्य > कामान्य > कामान्ज >कामन्स > कामानीज़ communis (Latin)। फिर लेटिन से अँग्रेजी की यात्रा तो हम देख ही चुके हैं।

आप क्या सोचते हैं?
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How mango might have got its names आम का नामकरण कैसे हुआ होगा        

Mango People, AAM AADAMI, and Common Man  

Some days ago, Mrs Sonia Gandhi’s son-in-law Robert Vadra wrote on his Facebook status: “Mango people in a banana country”. The use of the expression ‘mango people’ by Vadra caused a huge controversy. Consequently, the expression 'mango people’ is gaining currency in India. Who knows, 'mango people' may soon find its place in the Oxford English Dictionary as synonym for the 'common man'!

What is the origin of the phrase "mango people" and who coined it? There is no answer to these questions right now and it will require some more will research. But one thing is certain that the usage of 'mango people’ for common men is not a product of Robert Vadra’s brain. But yeah, Vadra has some relationship with the origin of 'mango people'.


For many years, at the time of elections, Robert's mother-in-law Mrs Sonia Gandhi and her Congress party have been using her photo with a slogan: "CONGRESS KA HAATH, AAM AADAMI KE SAATH (hand of congress is with the common man). This slogan does not seem credible to many people in the country. They oppose it in their own way. Nowadays, when Arvind Kejriwal comes out on streets to oppose the congress party, he is seen wearing a cap with the words: "MAIN HOON EK AAM AADAMI”, i.e. I am the common man".  And by doing this Kejriwal is obviously ridiculing the AAM ADAMI slogan of Sonia ji. There is no dearth of articles and cartoons ridiculing the AAM ADAMI slogan on the Internet. Some authors and cartoonists call the common man as the ‘mango people’.  In fact, for many years now, several people in the cyberspace have been calling themselves as ‘mango man’. When stung by corruption charges against him, Robert Vadra wrote the scornful line on the Facebook, “mango people in banana republic", he was clearly targeting Arvind Kejriwal wearing a AAM ADAMI cap.

The Hindi/ Urdu word AAM used in AAM ADAMI has two meaning, (1) used in the sense of common, simple, modest, masses, the word AAM is a borrowing from Arabic. The word came to India with the invading Arabs and Iranians in medieval times. (2) the mango fruit is known as AAM in Hindi, Urdu, Bengali, Asamese, Punjabi. The origin of the word mango and AAM was discussed earlier in another article in this blog (How mango might have got its names आम का नामकरण कैसे हुआ होगा).  Today we discuss the origin of the word AAM in the sense of its usage for ‘common’.

In my opinion, the Sanskrit word 'SAMA' 'सम' (= similar, simple, modest, common) transformed into the Arabic AAM through degeneration, and returned to Hindi, Urdu and other Indian languages in its new acquired form. It is well known that the Sanskrit characters sha / Sha ष/ sa transform into ‘ha ' in Persian, Arabic and Turkish. It changes further into a, or i in Greek. The most familiar example of this transformation is: Sindhu > Hindu> Indu> India; and Sindhu > Indus. Therefore, the process of evolution of AAM आम from SAMA सम may have been: SAMA> HAMA > AAMA > AAM.

Let’s now examine the origin of the word ‘common’. According to linguists, the Latin word commūnis gave rise to the English word common: Latin commūnis common> Old French comun > Anglo-French comun > Middle English comun> English common ~ 1250-1300;
But then, what is the origin of the Latin word commūnis? The DNA of commūnis shows its strong homology to Sanskrit words for common SAMA सम and SAMANA समान. The sound of 's' in Sanskrit words changes to sh /k / ch in many European words, e.g. SAHA सह > co, and SAMITI समिति > committee.  Therefore the etymology of common should be redefined as follows: SAMA (Sanskrit) = common > SAMANA (Sanskrit) = common > SAMANYA (Sanskrit) = common > CHAMANAYA > KAMANYA > KAMANZ > KOMONIS> communis Latin > comun (French) > common (English).

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