Sunday, August 23, 2015

माउंट एवरेस्ट, सगरमाथा और गौरीशंकर


आइये, पुरखों के साथ एक और यात्रा को निकलते हैं; उन संस्कृत-भाषी पुरखों के साथ जिन्होंने माउंट एवरेस्ट और अन्य हिमालय शिखरों की खोज की थी। जी हाँ, यह बात पक्की है कि माउंट एवरेस्ट की खोज ब्रिटिश लोगों ने नहीं की थी। उनके आने से पहलेएवरेस्ट कोई अनाम शिखर भी नहीं था। अंगेज़ों के आने से एवरेस्ट को संस्कृत और नेपाली में सगरमाथा कहते थे। 19वीं सदी के ब्रिटिश सर्वेक्षकों ने त्रिकोणमिति (trigonometry ट्रिगोनोमीट्री) के प्रयोग से एवरेस्ट की ऊंचाई नापी थी, और सिद्ध किया था कि यही विश्व का उच्चतम पर्वत शिखर है। उन्होंने  ही सगरमाथा का नाम बदल कर पूर्व-सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया यानी भारत के महासर्वेक्षक सर जॉर्ज एवरेस्ट के सम्मान में माउंट एवरेस्ट कर दिया। नेपालियों ने ब्रिटिश सर्वेक्षकों को एवरेस्ट के पास ही एक और पर्वत शिखर गौरीशंकर के बारे में भी बताया था। लेकिन सर्वेक्षकों को भ्रम हो गया था कि गौरीशंकर भी सगरमाथा यानी एवेरेस्ट का ही एक और नाम है। यह भ्रम 100 से अधिक वर्षों तक जारी रहा। मैंने भी अपने प्राथमिक स्कूल की पाठ्य-पुस्तकों में यही गलत जानकारी पढ़ी थी। हम यह तो जान गए कि इस सर्वोच्च शिखर का नाम एवरेस्ट क्यों पड़ा था, किन्तु यह नहीं जानते कि सगरमाथा या गौरीशंकर नाम कैसे रखे गएऐसा माना जाता है कि नेपाली में सगरमाथा का अर्थ है 'सागर की माता'। किन्तु सागर और पर्वत शिखर का क्या संबंध? पर्वत शिखर पर बर्फ, बर्फ पिघलने से पानी, पानी से  नदी, नदी से सागर; इसलिए पर्वत हुआ सागर की माता! यह तो बहुत दूर की कौड़ी हुई! दूसरी ओर 'गौरीशंकर' का अर्थ है भगवान शिव और उनकी पत्नी गौरी/ पार्वती। और माना जाता है कि गौरी और शंकर तो हिमालय पर ही रहते हैं। क्या स्वयं  गौरी और शंकर इस शिखर को गौरीशंकर कहते होंगेउत्तर पाने के लिए हम कल्पना करते हैं कि हम प्राचीन काल के उन यायावर खोजी पुरखों के साथ है जिन्होंने पहली बार सागरमाथा और गौरीशंकर को देख कर उनका नामकरण किया होगा। ऊँचा पर्वत शिखर देख कर पुरखों ने संस्कृत में कहा होगा -- गिरि शिखर! और बाद की पीढ़ियों ने उसे बोला होगा

गिरिशिखर > गौरीशिखर > गौरीशिकर गौरीशिंकर > गौरीशंकर! 
   
और हिमालय का सबसे ऊँचा शिखर देख कर पुरखों के मुँह से संस्कृत में निकला होगा –शिखरतमा, अर्थात सबसे ऊँचा शिखर !!
इसी शिखरतमा शब्द में बाद में कुछ बदलाव आए होंगे, शायद कुछ इस तरह 
शिखरतमा > शिखरमता > सिगरमता > सिगरमथा > सगरमाथा

(फोटो विकिपीडिया से साभार
https://en.wikipedia.org/wiki/Mount_Everest#/media/File:Mount_Everest_as_seen_from_Drukair2_PLW_edit.jpg

Mount Everest, Sagaramatha and Gaurishankar


 

हिन्दी में पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें : माउंट एवरेस्ट, सगरमाथा और गौरीशंकर

Let's go today for a time-travel with our Sanskrit speaking ancestors who had discovered Mt. Everest and other Himalayan peaks. To be sure, the British had not discovered Mt. Everest and that it was not an un-named peak when they arrived on the scene.   Mt. Everest was known as Sagar.māthā सगरमाथा in Sanskrit and Nepali. By using trigonometry, the British surveyors of in the 19th century had measured the height of Sagarmāthā, and had declared it to be the world's highest mountain peak. They re-named Sagarmāthā in honour of Sir George Everest, the former Surveyor General of India.  The Nepalese had also told the British surveyors about another high peak called Gauri.shankar. Somehow, confusion prevailed that Gaurishankar is another name of Sagarmāthā, i.e. Everest. The confusion lasted for more than a hundred years. As a primary school student in the 1960s, I had also read in my textbooks that Gaurishankar is the Indian and Nepali name of Mt. Everest. While we know the story behind the name Everest, we have no clues about the etymology of Sagarmatha or Gaurishankar.  It is believed that Sagarmatha in Nepali means ‘Mother of the Sea’. But why is a mountain being called the mother of sea? Is it because the snow covered peaks are source of water that flows in rivers that go to form the sea? However, this explanation seems to be too far-fetched! On the other hand, Shankar means Lord Shiva and Gauri is another name of his wife Parvati. Both Gauri and Shankar are believed to live in the Himalayas. Would Gauri and Shankar call this peak by their own names Gaurishankar? 

Let's imagine that we are travelling with our explorer ancestors who saw and named Sagarmatha and Gaurishankar for the first time. On seeing the peak, our ancestors might have used the Sanskrit words for ‘mountain peak’ -- GIRI.SHIKHAR गिरिशिखर (Giri mean mountain and shikar mean peak). And this word might have changed while getting passed down the generations in the following way-- 
Giri.shikhar गिरिशिखर > Gauri.shikhar गौरीशिखर > Gauri.shikar गौरीशिकर > Gauri.shinkar गौरीशिंकर > Gauri.shankar गौरीशंकर!


On seeing the highest Himalayan peak, our ancestors might have said in Sanskrit – SHIKHAR.TAMA (highest peak)! And the word would have changed in this manner -- 
Shikhar.tama शिखरतमा > Shikhar.mata शिखर मता > Sigar.mata > सिगरमता > >  Sagar.matha  सगरमथा > Sagarmāthā सगरमाथा 

Image of Mt Everest from Wikipedia : 
https://en.wikipedia.org/wiki/Mount_Everest#/media/File:Mount_Everest_as_seen_from_Drukair2_PLW_edit.jpg

Sunday, August 16, 2015

अँग्रेज़ी शब्द इंडिपेंडेंस Independence (स्वतंत्रता) का संस्कृत डीएनए



शब्दों की व्युत्पत्ति सिद्धांत के अनुसार, किसी भी भाषा का प्रत्येक शब्द उस भाषा या उसकी मूल भाषा के किसी धातु-शब्द’/root word से निकलता है। धातु-शब्दों के इस सिद्धांत पर अत्यधिक निर्भरता के कारण, कई बार, जांच गलत दिशा में चली जाती है, और भाषाविद् किसी ऐसे शब्द की ओर मुड़ जाते हैं जिसमें ध्वनि साम्यता तो है किन्तु जिसका अर्थ और भावना भिन्न है। उदाहरण के लिए, यह अजीब परिणाम देखिये-- अँग्रेज़ी शब्द हस्बंड husband (पति) का उत्स नोर्स भाषा के हस्बोंडी (hūsbōndi) यानी घर से बंधा हुआ से बताया गया है! एक पुरानी ब्लॉग-पोस्ट में मैंने लिखा था कि हस्बंड husband गलत वर्तनी/ उच्चारण वाला संस्कृत शब्द सह-बंध है। आज हम अँग्रेज़ी शब्द independence इंडिपेंडेंस (स्वतंत्रता) को जाँचते है। इस शब्द का उत्स इस तरह  बताया गया है:
लैटिन शब्द पेंडेरे pendere (लटकना) > de डि + pendere पेंडेरे = dependere डिपेंडेरे  (नीचे लटका हुआ)> फ्रेंच  dependre > 15वीं सदी के अँग्रेज़ी शब्द depend डिपेंड (निर्भर या आश्रित होना) > dependent डिपेंडेंट > in इन + dependent डिपेंडेंट = independent इंडिपेंडेंट (स्वतंत्र) > independence इंडिपेंडेन्स (स्वतंत्रता) । डिपेंड में स्वाभाविक या स्वैच्छिक रूप से निर्भर या आश्रित होने का भाव है। अतः इंडिपेंडेंट और इंडिपेंडेन्स शब्दों की इस व्याख्या से 'मन या कर्म से दूसरों के प्रभाव पर निर्भर न होने का भाव निकलता है। लेकिन यह व्याख्या किसी अन्य व्यक्ति या देश के द्वारा जबरन बंधन या धीनता से मुक्त होने की भावना व्यक्त करने में विफल है। यह पक्की बात है कि स्वतंत्रता दिवस का उत्सव विदेशी शक्तियों पर हमारी निर्भरता के अंत का उत्सव नहीं है, यह तो हमारी दासता के बंधन कटने का पर्व है। इसलिए, independence इंडिपेंडेन्स शब्द की पारंपरिक व्युत्पत्ति स्वीकार्य नहीं हो सकतीहम 'बंधन का अंत' के लिए संस्कृत शब्द और 'independence इंडिपेंडेन्स शब्द' के रिश्ते की जाँच करते हैं। संस्कृत शब्द बंधम और लैटिन शब्द bandum बंड़म मामूली ध्वन्यात्मक परिवर्तन के साथ एक ही शब्द है। बंध, बाँध, बंधन, band बैंड और belt बेल्ट जैसे शब्दों में इसका डीएनए है। इस तथ्य को यूरोपीय भाषाविदों ने स्वीकार किया है। इसलिए, 'independence इंडिपेंडेन्स की व्युत्पत्ति लैटिन pandere (लटकना) से नहीं अपितु लैटिन bandum (बांधना, जोड़ना) से मानी जानी चाहिए। पराधीन के लिए संस्कृत से निकले शब्दों में बंदी, बांदी, बंधुआ, बंधित, बंधनित हैं। अन्त + बंधनित = अन्तबंधनित (बंधन का अंत)। अन्तबंधनित में उच्चारण दोष हुए होंगे: अ>, >>,>,>ड। और इस तरह संस्कृत का अन्तबंधनित बन गया इंडिपेंडेंट independent (बंधनमुक्त) और फिर उससे इंडिपेंडेन्स independence। ध्वनियों में ये सभी बदलाव एक पुरानी ब्लॉग-पोस्ट में बताये 'अनुमेय परिवर्तन की तालिका के अनुसार हैं।

आशा है कि आप अँग्रेज़ी शब्द independence इंडिपेंडेन्स के संस्कृत डीएनए की जाँच से आश्वस्त हैं?

Independence – Sanskrit DNA of English Word


 According to etymology theory, each word in a language originates from a root word in that language or its mother language. Quite often, the excessive reliance on this theory of roots leads to similar sounding words in the closely related languages that are unrelated to the word being examined. Sometimes, it may lead to funny results, e.g. the etymology of husband from Norse word hūsbōndi, i.e. house--bound. I have shown in another blog-post that ‘husband’ is a misspelt Sanskrit word ‘saha.bandh’सहबंध, i.e. co-bound. Let’s take the case of the word 'independence'. Its origin is said to be as follows: 
Latin word pendere (to hang) > de+pendere = dependere (to hang from, to hang down) > French word dependre > 15th century English word 'depend' (to be attached to as a condition or cause, as a figurative use) > dependent > in + dependent = independent > independence. 'To depend' implies a sense of voluntary dependence. Therefore, this interpretation of the word 'independence' may be perfectly fine in the sense of 'not being influenced by the thought or action of others', but it fails to convey the sense of freedom from bondage or subjugation of another person or country. To be sure, what we celebrate on the Independence Day is not the end of dependence on foreign powers but the end of our bondage from them. Therefore, the traditional etymology of the word independence is un-acceptable. Let’s examine the Sanskrit words for ‘end of bondage’ and its relation with the word ‘independence’.  The Sanskrit word bandham बंधम (bind) and the Latin word bandum is the same word with slight phonetic change. It gave rise to words like bind, bond, band and belt. This fact is acknowledged by European linguists. Therefore, I believe that the etymology of ‘independence’ should have been sought from Latin bandum instead of Latin pandere (to hang).
The Sanskrit words for bonded/ bound are bandi बंदी / bandhit बंधित / bandhanit बंधनित; and the Sanskrit word for end is anta अंत. Joining the two Sanskrit words:  anta अंत + bandhanit बंधनित = antabandhanit अंतबंधनित (end of one’s bondage). Sanskrit ‘antabandhanit’ changes to English ‘independent after phonetic mutations a>i, t> d, b>p; a>e, dh>d (all permissible mutations defined in the ‘Table of Permissible Mutations’ in aprevious blog post).

I hope that you convinced about the Sanskrit DNA of the words independent and independence? 

Wednesday, October 22, 2014

दीवाली हो, फिर भी बर्थडे पर मोमबत्ती क्यों बुझाते हैं? Blowing out candles on birthday even if it is Diwali

मान लीजिये कि आप दीवाली को पैदा हुए थे और अपना बर्थडे भी शुभ दिन दीवाली को ही मनाते हैं। इस साल 2014 ई॰ में दीवाली 23 अक्तूबर को है। अतः प्राचीन भारतीय पंचांग के अनुसार आप का बर्थडे इस साल दीवाली वाले दिन 23 अक्तूबर 2014 को सूरज उगने से शुरू होगा। लेकिन यदि आप 23 अक्तूबर को पैदा हुए थे तब अंतर्राष्ट्रीय मानक पंचांग के अनुसार 22 अक्तूबर की आधी रात 12 बजे 23 अक्तूबर शुरू हो जाएगा। 23 अक्तूबर को जन्म दिवस वाले अनेक बच्चे और बड़े 22 की रात के 12 बजे मोमबत्तियाँ बुझा कर और केक काट कर अपना बर्थडे मनाएंगे। अनेक हिन्दू पुनरुत्थानवादी नेताओंराष्ट्रवादियोंऔर शिक्षा बचाने की ध्वजा उठाने वालों को बर्थडे पर मोमबत्तियाँ बुझाना पसंद नहीं है। कारण स्पष्ट है-- प्रकाश ज्ञान और विवेक का प्रतीक हैंअंधकार अज्ञान और अविवेक का। फिर शुभ दिन को प्रकाश बुझाना अशुभ है। सही बात हैभारतीय परंपरा में तो हर शुभ काम दीपक जलाने से ही शुरू करते हैंचाहे उस समय आसमान पर सूरज क्यों न चमक रहा हो। ओलंपिक खेलों में भी लाखों वाट की रोशनी से जगमगाते स्टेडियम में मशाल से एक विशाल ज्योति जलाई जाती है। हम यह जानना चाहते हैं कि बर्थडे में मोमबत्ती बुझाने की यह ‘अशुभ’ परंपरा कहाँ से आयीचलिये एक बार फिर पुरखों के साथ एक काल्पनिक यात्रा को चलते हैं और देखते हैं कि बर्थडे को दीपक बुझाना कैसे शुरू हुआ होगा।    

हम हजारों साल पीछे पहुँच गए हैं। हमारे भील-शिकारी घुमंतू पुरखों ने अभी दुनिया के पहले गाँव बसाये हैं। घुमंतू पुरखे प्रायः कंदमूल और फल ही खाते हैं। लेकिन गाँव बसाने के बाद खाना भी पकाने लगे हैं। खाना पकाना कोई आसान काम नहीं हैं। इसके लिए आग जलाना काफी नहीं हैआग जलती रहे उसके लिए लगातार ईंधन डालना पड़ता है। आग को हवा देनी होती है। जलता हुआ चूल्हा मानव समाज के लिए एक बहुत बड़ी तकनीकी उपलब्धि है। पकाने के लिए बर्तन भी चाहियेँ। गाँव में एक बच्चा है। नाम है राजू। राजू की माँ रोज चूल्हा नहीं जला पाती। किन्तु कल राजू का हॅप्पी बर्थडे है। अतः आज चूल्हा जरूर जलेगा। हमारे पुरखे जन्म दिन याद रखते हैं। उन्हें सूरजचाँदचाँद की कलाओंऔर तारों की स्थितियों को देखते रहने से जन्म दिन याद रहता है। वास्तव में जन्म का दिन तो नहीं उसके पास वाली पूर्णिमा या अमावस ठीक याद रहते हैं। अधिकतर लोग जन्म दिन पूर्णिमा को मनाते हैं। राजू की माँ उसके जन्म दिन पर हमेशा हलवा केक बेक करती है / पकाती है। राजू को अपने जन्म दिन का इंतजार रहता है। उसे हलवे का इंतजार रहता है। माँ राजू के जन्म दिन से पहली रात को हलवा पका चुकी है। राजू उसे रात को ही खाना चाहता है। लेकिन राजू को सुबह तक इंतजार करना होगा। तिथि सूरज उगने से शुरू होती है। अतः जन्म का दिन तो सुबह है। आज की रातराजू को नींद नहीं आ रही। राजू दिये जला कर बैठा है। लकड़ी की तीलियों की नोक के ऊपर जंगली-अरंडी के पौधों के तैलीय बीज लगे हैं। हर बीज बहुत देर जलेगा। यही दुनिया के पहले दीपक हैं। राजू सारी रात लगातार हलवे के बर्तन को देख रहा है।  बार-बार हलवे के बर्तन के चक्कर लगा रहा है। आखिर किसी तरह पौ फूटी। सूरज उगने को है। राजू का बर्थडे आ गया है!

माँसुबह हो गयी। अब मैं हलवा-केक खा लूँ?”
हाँ बेटापर पहले दिये तो बुझा ले। ये दिये कल रात को फिर काम आएंगे। ज़ोर से फूँक मार।
राजू ज़ोर से फूँक मार कर सारे दिये बुझाता है। और अपना बर्थडे केक काटता है। राजू की बहनें जीभा और भाषी भी जग गईं हैं। माँ सभी को हलवा केक खिलाती हैं।

माँ गाती है: शुभ प्रज दिव राजू s s s s !   

दिये बुझानेकेक काटने और मंगल गाने की परंपरा अब भी जारी है। 
    
जीभा और भाषी हलवा केक खाने के बाद फिर से शब्दों का खेल में जुट जाती हैं। आइये सुनें वह क्या खेल रहीं हैक्योंकि यह खेल मानव समाज की भावी पीढ़ियाँ आने वाली कई सदियों में खेलने वाली हैं ---  
·       प्रज > पर्ज > पर्द > बर्द > बर्थ
·       दिव > देय > दे > डे
·       शुभ > हुभ > हुप > हपु > हपी > हॅप्पी
·       शुभ प्रज दिव > हॅप्पी बर्थ डे 
·       ज्वाला च्वाला > च्याला > चहाला > चूल्हा
·       ज्वाला ह्वाला > हवला > हलवा
·       ज्वाला ज्वालाई > हवालइ > हलवाई
·      ज्योतिर च्योतिर > क्योतिर > क्योतिल > क्योदिल > क्यांदिल > कंदील > कैन्डल 
·       पाकः (पकाना) > पाके > बाके > बेक 
·       पाकः > पाककः / पाकुकः (रसोइया) > कुक cook > केक cake  
भारतीय समय गणना और परंपरा में नया दिन नए सूरज के उगने से शुरू होता है। वास्तव मेंएक समय ऐसा था जब पूरी दुनिया में यही व्यवस्था चलती थी। उस प्राचीन समय के भारत की कल्पना कीजिये जब ज्ञान-विज्ञान का सूर्य केवल भारत में ही उगा था। जब भारत में सुबह सूरज उगता थायानी नई तिथि/ नया दिन / शुरू होता थाउस समय इंग्लैंड और पश्चिम यूरोप में लगभग आधी रात होती थी। मैं नहीं जानता कि क्या आधी रात को नई तिथि बदलने के पश्चिमी रिवाज का सम्बंध इस बात से था कि पश्चिम में आधी रात के समय भारत में सूरज उगता था और तिथि बदलती थी!*

सूरज हर दिन अलग समय पर उगता हैअलग समय पर अस्त होता है। अतः प्राचीन पंचांग के मानने वालों के लिएएक ही स्थान पर रहते हुए भीहर दिन का आरंभ अलग समय पर होता था / हैऔर अंत भी अलग समय पर। अगर किसी देश में आधी रात को नई तिथि आरंभ करनी है तब आधी रात (यानी सूरज छिपने से ले कर सूरज उगने के समय का ठीक आधा) भी हर रोज अलग समय पर होगी। अतः नई तिथि शुरू होने के लिए कोई मानक समय की आवश्यकता रही होगी। आधुनिक समय मेंसमय का अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण हुआ है। पूरी दुनिया में कहीं भी सूरज कभी छिपेकभी उगेलेकिन हर समय ज़ोन में आधी रात वहाँ के 12 बजे मानी जाती हैऔर उसी समय से नई तिथि भी शुरू हो जाती है। 
बर्थडे पर कोई दीपक जलाए या मोमबत्ती बुझायेबर्थडे रात के 12 बजे मनाये  या फिर सूर्योदय परइससे न हमारे देश को कोई हानि है न धर्म को कोई खतरा है। जैसे बंदरिया अपने मरे हुए बच्चे को हफ्तों छाती से चिपकाए रहती हैउसी तरह मानव मन बस यूं ही बेकार की पुरानी परम्पराओं को चिपकाए चलता है ये कालग्रस्त परम्पराएँ जन्ममरणविवाह के समय होने वाले कर्मकांड भी हो सकते हैभारत-पाक वागाह सीमा पर रोज शाम होने वाली शत्रु को आँख दिखाने की रस्म भी हो सकती हैसंसद के बजट सत्र में आने के लिए राष्ट्रपति की घोड़ा-बग्घी की सवारी भी हो सकती हैया राष्ट्रपति की लिमोसीन कार को घेरे घुड़सवार अंगरक्षक भी। हमारे अंगों और मन से चिपके सांस्कृतिक चीथड़ों की सूची बहुत लंबी है। लेकिन फटे-पुराने देसी चीथड़ों को चिपकाए रखने का आग्रह और किसी भी तरह के विदेशी चीथड़ों का विरोधकिसी स्वस्थ मानसिकता के लक्षण नहीं हैं।         

*शायद आपको याद हो कि आजादी के 52 साल बाद भी भारत की संसद में एक ब्रिटिश परंपरा लागू थी। 1999 तकहर वर्षबजट शाम को 5 बजे पेश किया गया। ऐसा इसलिए किया जाता था क्योंकि अंग्रेजों के समय में लंदन में दिन के 12 बजे वहाँ की संसद का सत्र शुरू होता था। उस समय भारत में शाम के 5 बजते हैं। लंदन और दिल्ली में बजट एक साथ पेश हो। इसलिए दिल्ली में शाम को बजट शाम को 5 बजे पेश होता था। अंग्रेज़ 1947 में भारत से चले गए पर हम बिना सोचे 52 साल बाद तक उनका आदेश मानते रहे! कभी भारत में तिथि सूर्योदय पर बदलती थी और लंदन में उस समय आधी रात होती थी। क्या आधी रात को तिथि बदलने की आधुनिक व्यवस्था का अर्थ है कि यूरोप की अवचेतन स्मृति में वह पुरानी भारतीय व्यवस्था अब भी मौजूद है??