Thursday, April 16, 2020

सूतक शब्द कहाँ से आया?

कोरोना वायरस महामारी के समय में सूतक शब्द की चर्चा है। ऐसा लगता है कि पूरी दुनिया को सूतक लगा है। सूतक संस्कृत का शब्द है। इसका मूल अर्थ है -- अपवित्रता / अशुद्धता / अशौच। इस शब्द का प्रयोग विशेष स्थितियों में परिवार वालों को होने वाली अशुद्धता के लिए होता हैजैसे 1. जननाशौच-- बच्चे के जन्म के समय या स्त्री के गर्भपात के कारण; 2. गाय के बच्चा देने पर; 3. मरणाशौच -- परिवार में किसी के मरने पर। 4. सूर्य या चंद्रमा का ग्रहण के समय।
हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार सूतक की अशुद्धता निश्चित अवधि के लिए रहती है। जैसे बच्चा पैदा होने पर 10 दिन और मृत्यु होने पर 12 दिन के लिए। सूतक के आरंभ होते ही घर में रखे हुए पानी और भोजन को अपवित्र मान कर फेंक दिया जाता है। परिवार जनों के द्वारा द्वारा अनेक वस्तुओं को छूना मना होता है। परिवार में धार्मिक क्रियाएं मना होती हैं। किसी को भी सूतक लगे परिवार के भोजन या पानी को छूना मना होता है। किसी की मृत्यु होने पर सूतक की अवधि में उस परिवार में भोजन बनाना भी मना होता है। गुल्लक में रुपया डालने भी मना है। आधुनिक युग में अधिकतर परिवारों में व्यावहारिक कारणों से सूतक के निषेधों का पूरा पालन नहीं किया जाता। 
सूतक की अवधि समाप्त होने पर घर की शुद्धि के लिए औषधीय वनस्पतियों की हविषा दे कर हवन किया जाता है।

ऐसा मानने के पर्याप्त कारण हैं कि प्राचीन काल में सूतक प्रथा आरंभ करने के पीछे संक्रमण रोकने के लिए जन स्वास्थ्य की नीति रही होगी।

सूतक शब्द का उत्स एक रहस्य है। संस्कृत व्याकरण के नियम के अनुसार सूतक शब्द का उत्स सूत होना चाहिए
सूत > सूतक
  
सूत के अनेक अर्थ हैंजैसे 1. जन्मा हुआउत्पन्न। 2. सारथी अर्थात रथ चलाने वाला। 3. बंदीजन। 4. सूर्य। 5. पारा।

सूत शब्द का कोई भी अर्थ सूतक प्रथा में अंतर्हित छुआ-छूत की भावना को नहीं छूता। सूत शब्द के इन विभिन्न अर्थों में कुछ भी समानता नहीं है। अतः इन सभी अर्थों के लिए सूत शब्द के अनेक उत्स होने चाहिए। 

मेरा प्रस्ताव है कि सूतक शब्द छूत पर आधारित शब्द छूतक का अपभ्रंश है। मूल छूतक शब्द विलुप्त हो चुका है। 

छूत > छूतक > सूतक 

सूतक का सूत से कोई संबंध नहीं है। 

आपका क्या विचार हैक्या आप सहमत हैंआपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहेगी।    




1 comment:

  1. Mujhe to ye sahi lg rha hai..
    सूतक संस्कृत का शब्द है। इसका मूल अर्थ है -- अपवित्रता / अशुद्धता / अशौच। इस शब्द का प्रयोग विशेष स्थितियों में परिवार वालों को होने वाली अशुद्धता के लिए होता है; जैसे 1. जननाशौच-- बच्चे के जन्म के समय या स्त्री के गर्भपात के कारण; 2. गाय के बच्चा देने पर; 3. मरणाशौच -- परिवार में किसी के मरने पर। 4. सूर्य या चंद्रमा का ग्रहण के समय।
    हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार सूतक की अशुद्धता निश्चित अवधि के लिए रहती है

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